आकाश लोहार/विकाश कुमार
गढ़वा
किसी के घर में शादी की खुशी है,कहीं धार्मिक आयोजन की तैयारी,तो कहीं जुलूस और सामाजिक कार्यक्रमों की रौनक,इन आयोजनों में DJ और लाउडस्पीकर की आवाज अक्सर माहौल को उत्साह से भर देती है,लेकिन यही आवाज जब तय सीमा को पार कर किसी के सुकून,नींद और स्वास्थ्य पर भारी पड़ने लगे तो सवाल भी उठता है,आखिर इसकी सीमा क्या हो,अब इसी सवाल का जवाब झारखंड सरकार ने सख्ती के साथ देने की तैयारी कर ली है,झारखंड के शहरी इलाकों में अब बिना अनुमति DJ, लाउडस्पीकर और तेज आवाज वाले ध्वनि उपकरण बजाना भारी पड़ सकता है,नियमों का उल्लंघन किया तो कार्रवाई के साथ साथ जुर्माना भी देना पड़ सकता है।
नगर निकायों के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी :- राज्य में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नगर निकायों को अब नियमों का सख्ती से पालन कराने की जिम्मेदारी दी गई है,राज्य शहरी विकास अभिकरण के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने राज्य के सभी नगर आयुक्त,अपर नगर आयुक्त,उप नगर आयुक्त और कार्यपालक पदाधिकारियों को पत्र जारी कर ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों का कड़ाई से अनुपालन कराने का निर्देश दिया है,यह निर्देश राज्य के नगर निगम,नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में लागू होगा।
बिना लिखित अनुमति लाउडस्पीकर बजाया तो कार्रवाई :- झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 के तहत नगर निकायों को ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार दिया गया है,निर्देश के मुताबिक नगर आयुक्त या कार्यपालक पदाधिकारी की लिखित अनुमति के बिना लाउडस्पीकर बजाना प्रतिबंधित रहेगा,नियम तोड़ने पर दो हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है,वहीं अगर किसी व्यक्ति या समूह द्वारा सार्वजनिक शांति भंग की जाती है या ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े आदेशों का उल्लंघन किया जाता है,तो पांच हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
धार्मिक स्थल हों या सार्वजनिक आयोजन…नियम सबके लिए :- ध्वनि प्रदूषण के नियम सिर्फ शादी या सामाजिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेंगे,धार्मिक स्थलों पर इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर को लेकर जारी आदेश में अनुमति की प्रक्रिया का अलग से स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है,हालांकि झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों के तहत लाउडस्पीकर और DJ के इस्तेमाल के लिए निर्धारित अनुमति और ध्वनि मानकों का पालन जरूरी होगा,यानी आयोजन चाहे धार्मिक हो,सामाजिक हो या सार्वजनिक ध्वनि विस्तारक यंत्रों का इस्तेमाल नियमों के दायरे में ही करना होगा।
तीन महीने में चिन्हित होंगे साइलेंस जोन :- सरकार ने नगर निकायों को अपने अपने क्षेत्रों में साइलेंस जोन चिन्हित करने का निर्देश भी दिया है,यह काम संबंधित उपायुक्त के दिशा निर्देश में तीन महीने के भीतर पूरा किया जाना है,इसके साथ ही नगर निगम और अन्य नगर निकाय क्षेत्रों को औद्योगिक,वाणिज्यिक,आवासीय और साइलेंस जोन के रूप में निर्धारित किया जाएगा,हर जोन में निर्धारित ध्वनि सीमा की जानकारी देने वाले साइन बोर्ड भी लगाए जाएंगे,ताकि लोगों को साफ तौर पर पता रहे कि कहां कितनी आवाज की अनुमति है।
6 मई 2026 की SOP का भी करना होगा पालन :- सरकार ने वन,पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से 6 मई 2026 को संकल्प संख्या 1894 के तहत जारी मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP का भी हवाला दिया है,सभी नगर निकायों को इस SOP में निर्धारित प्रावधानों को अपने अपने क्षेत्र में लागू कराने का निर्देश दिया गया है,वहीं संबंधित उपायुक्तों को पूरी व्यवस्था की निगरानी और नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अब आयोजकों की भी बढ़ेगी जिम्मेदारी :- सरकार के इस निर्देश के बाद शादी विवाह,धार्मिक आयोजन,जुलूस,सामाजिक कार्यक्रम और अन्य सार्वजनिक आयोजनों के आयोजकों को DJ और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर विशेष सावधानी बरतनी होगी,अनुमति के बिना इस्तेमाल,या निर्धारित ध्वनि सीमा से ज्यादा आवाज दोनों ही स्थिति में कार्रवाई हो सकती है।
संदेश साफ है,खुशियां आपकी,सुकून सबका :- DJ की धुन पर खुशी मनाना गलत नहीं,धार्मिक आयोजन में भक्ति के स्वर गूंजना भी गलत नहीं,लेकिन जब आवाज किसी बुजुर्ग की नींद,किसी बच्चे की पढ़ाई,किसी मरीज के आराम या किसी आम नागरिक के सुकून में बाधा बनने लगे,तो सवाल जरूर उठता है,सरकार के इस कदम का मकसद भी यही है कि खुशियां मनें,त्योहार मनें,आयोजन हों,लेकिन किसी दूसरे के अधिकार और सुकून की कीमत पर नहीं,अब झारखंड के शहरी क्षेत्रों में तेज आवाज में DJ और लाउडस्पीकर बजाना पहले जितना आसान नहीं होगा,नियम होंगे तय,निगरानी होगी सख्त और उल्लंघन हुआ तो कार्रवाई के साथ जुर्माना भी तय है,क्योंकि आवाज चाहे खुशी की हो या उत्सव की,उसकी एक मर्यादा जरूरी है।
