आकाश लोहार/विकाश कुमार
गढ़वा
किसी गरीब परिवार के लिए घर सिर्फ चार दीवारें नहीं होता,उसमें उसकी मेहनत,उसकी जमा पूंजी,उसके सपने और आने वाले कल की उम्मीदें बसती हैं,लेकिन जब अचानक आग की लपटें उसी आशियाने को निगल जाएं,तो पीछे सिर्फ राख नहीं बचती,बल्कि एक परिवार की पूरी जिंदगी बिखर जाती है,रमना प्रखंड के मंगरा विवाटीकर गांव में कुछ ऐसा ही हुआ,जहां आग ने उमाशंकर विश्वकर्मा के घर को पूरी तरह तबाह कर दिया।
*आग ने छीन ली जिंदगी भर की जमा पूंजी :-* बताया गया कि उमाशंकर विश्वकर्मा के घर में अचानक आग लग गई,देखते ही देखते आग ने पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया,इस अगलगी में जमीन के जरूरी कागजात,करीब 65 हजार रुपये नकद,सोना चांदी के आभूषण,राशन सामग्री,कपड़े और घर का लगभग पूरा सामान जलकर राख हो गया,आग बुझने के बाद जब परिवार ने अपने आशियाने की तरफ देखा,तो वहां बचा था सिर्फ मलबा और राख,जिस घर में कभी परिवार की खुशियां थीं,वहां अब बेबसी और चिंता का माहौल है।
*मुश्किल वक्त में मदद बनकर पहुंचा फाउंडेशन :-* घटना की जानकारी मिलते ही जानकी सामूहिक विवाह फाउंडेशन के सचिव रितेश तिवारी उर्फ महाकाल तिवारी गांव पहुंचे,उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर घटना की पूरी जानकारी ली और उनकी स्थिति को करीब से देखा,जिला परिषद अध्यक्ष शांति देवी के नेतृत्व में फाउंडेशन की ओर से पीड़ित परिवार के लिए राशन सामग्री की व्यवस्था की गई,साथ ही तत्काल 2,100 रुपए की आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई,यह मदद भले ही रकम में छोटी हो,लेकिन जिस परिवार के सामने इस समय जिंदगी दोबारा शुरू करने की चुनौती खड़ी है,उसके लिए किसी अपने के साथ खड़े होने का एहसास बहुत बड़ा है।
*जिला परिषद अध्यक्ष शांति देवी ने कहा :-* यह सिर्फ एक परिवार का घर जलने की घटना नहीं है,बल्कि एक परिवार के सपनों और वर्षों की मेहनत का उजड़ जाना है,ऐसे समय में पीड़ित परिवार को अकेला छोड़ देना मानवता नहीं है,हमारी कोशिश है कि परिवार को तत्काल जरूरत की सामग्री उपलब्ध कराई जाए और आगे भी जो संभव होगा,वह सहयोग किया जाएगा,दुख की इस घड़ी में हम पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं,साथ ही उन्होंने कहा कि समाज के सक्षम लोगों और सामाजिक संगठनों को भी ऐसे परिवारों की मदद के लिए आगे आना चाहिए,ताकि विपदा की इस घड़ी में कोई परिवार खुद को अकेला महसूस न करे।
*जानकी सामूहिक विवाह फाउंडेशन के सचिव रितेश तिवारी उर्फ महाकाल तिवारी ने कहा :-* घर जलने का दर्द वही परिवार समझ सकता है,जिसने अपनी आंखों के सामने अपनी मेहनत की कमाई और जरूरत का सामान राख होते देखा हो,इस परिवार पर जो बीती है,उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है,आज हमारी कोशिश सिर्फ मदद करना नहीं,बल्कि परिवार को यह भरोसा दिलाना है कि इस मुश्किल घड़ी में वे अकेले नहीं हैं,उन्होंने आगे कहा कि जानकी सामूहिक विवाह फाउंडेशन का उद्देश्य केवल सामूहिक विवाह तक सीमित नहीं है,जहां भी कोई जरूरतमंद,असहाय या विपदा में फंसा परिवार होगा,वहां अपनी क्षमता के अनुसार मदद के लिए खड़ा होना हमारा सामाजिक दायित्व है,आज हम जितना कर सकते थे,उतना किया है और आगे भी पीड़ित परिवार के लिए हरसंभव सहयोग का प्रयास जारी रहेगा।
राख के बीच उम्मीद की एक किरण :- इस घटना ने एक परिवार से उसका आशियाना जरूर छीन लिया,लेकिन मुश्किल वक्त में जब समाज के लोग उसके साथ खड़े होते हैं,तो टूट चुके परिवार को फिर से संभलने की ताकत मिलती है,घर आग में जलकर राख हो गया,लेकिन इंसानियत की लौ अभी भी जिंदा है,जानकी सामूहिक विवाह फाउंडेशन की यह पहल इसी बात की गवाही देती है कि किसी की मुसीबत में उसके साथ खड़ा होना ही सबसे बड़ी सेवा है।
