गढ़वा से विकास कुमार की रिपोर्ट
गढ़वा जिला पाल महासंघ के संस्थापक अध्यक्ष, लोहियावादी विचारधारा के प्रबल समर्थक एवं समतामूलक समाज के पक्षधर बुधन पाल का निधन बीती रात लगभग 1 बजे उनके सहिजना स्थित आवास पर हो गया। वे अपने पीछे दो पुत्र राकेश कुमार और रुपेश कुमार समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
उनके निधन से पाल समाज सहित शोषित, वंचित एवं कमजोर वर्गों को गहरा आघात पहुंचा है। पिछले कई महीनों से वे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे।
बुधन पाल ने अपने जीवनकाल में सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक एवं सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने पाल समाज को संगठित एवं शिक्षित करने के साथ-साथ समाज के वंचित और पिछड़े लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए। राष्ट्रीय जनता दल से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले बुधन पाल अपने सरल स्वभाव, मृदुभाषी व्यवहार एवं शालीन व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे। समाज के विभिन्न वर्गों में उनकी स्वीकार्यता थी।
उनका अंतिम संस्कार सहिजना स्थित *दानरो नदी के श्मशान घाट* पर किया गया। मुखाग्नि उनके ज्येष्ठ पुत्र राकेश कुमार ने दी।
उनके दाह संस्कार के अवसर पर पाल महासंघ गढ़वा के अध्यक्ष सुधीर कुमार पाल, संरक्षक पारसनाथ पाल, सचिव रमेश पाल, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र पाल, युवा समाजसेवी राकेश पाल, डॉक्टर यासीन अंसारी, डॉ मुरली प्रसाद गुप्ता, जवाहर पासवान, रंजन चौबे, अरविंद मिश्रा, दिनेश सिंह, सुरज गुप्ता, गुड्डू सिंह, सुखबीर पाल, कृष्णा पाल, बुद्धदेव पाल, राजमोहन पाल, उदय पाल, अजय पाल, रामदेव पाल, सुमित पाल, कपिलदेव पाल, पुरनदेव पाल, विनोद पाल, रामचंद्र भगत समेत सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।
इस अवसर पर समाजसेवी राकेश पाल ने कहा कि _“यह हमारे समाज के लिए बहुत ही दुख की घड़ी है। इनके द्वारा हमारा समाज एक नई सोच के साथ आगे बढ़ रहा था और ये हमारे समाज के लिए हमेशा खड़े रहते थे। भगवान इनको अपने चरणों में शरण दें।”_
बुधन पाल का निधन पाल समाज ही नहीं, बल्कि समतामूलक समाज की स्थापना के लिए प्रयासरत सभी लोगों के लिए अपूरणीय क्षति है।
ॐ शांति।
