वैक्टर फ्री गढ़वा बनाने के लिए अंतर-विभागीय समन्वय एवं संयुक्त पहल आवश्यक- सिविल सर्जन

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विश्व मच्छर दिवस पर गढ़वा में अंतर-विभागीय बैठक का आयोजन; मलेरिया उन्मूलन के लिए सभी विभागों के समन्वय पर जोर

गढ़वा से विकास कुमार की रिपोर्ट

Accelerating the Fight Against Malaria for a More Equitable World” एक अधिक न्यायसंगत दुनिया के लिए मलेरिया के खिलाफ लड़ाई को तेज करना रहा कार्यक्रम का मुख्य थीम

मच्छरों से होने वाले वैक्टर जनित रोगों से विश्व भर में प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक लोगों की होती है मृत्यु- सिविल सर्जन

गढ़वा: आज दिनांक 20 अगस्त 2026 को “विश्व मच्छर दिवस” के अवसर पर सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार में एक महत्वपूर्ण अंतर-विभागीय बैठक का आयोजन किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की मुख्य थीम “Accelerating the Fight Against Malaria for a More Equitable World” (एक अधिक न्यायसंगत दुनिया के लिए मलेरिया के खिलाफ लड़ाई को तेज करना) रखी गई है।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए सिविल सर्जन डॉ० जे. एफ. कैनेडी ने जिले को मलेरिया और अन्य मच्छर जनित बीमारियों से मुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष 20 अगस्त को विश्व मच्छर दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य जन समुदाय को मच्छरों के कारण होने वाले वैक्टर जनित रोगो यथा- मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया एवं जापानीज इंसेफेलाइटिस से सुरक्षा एवं बचाव के प्रति जागरूक करते हुए बेहतर स्वास्थ्य के लिए उनका व्यवहार परिवर्तन किया जा सकें।

उन्होंने कहा कि मलेरिया एवं मच्छरों के काटने से होने वाले अन्य वैक्टर जनित बीमारियों के कारण विश्व भर में प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक व्यक्तियों की मृत्यु हो जाती है कोई भी देश ऐसा नहीं है जहां मच्छर नहीं है। उन्होंने मच्छर से होने वाली बीमारियों तथा इसके समाधान, बचाव, रोकथाम एवं अन्य तरीकों को विस्तार से बताया। सिविल सर्जन द्वारा आम जनता से भी अपील की गई है कि वे अपने घरों के आसपास पानी जमा न होने दें और सप्ताह में किसी एक दिन को ‘ड्राई डे’ के रूप में मनाते हुए कूलर, गमलों और बर्तनों के पानी को साफ करें। मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए बताए गए विभिन्न उपायों को अपनाने हेतु आमजनों से अपील की गई।

मौके पर उपस्थित जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉक्टर पुष्पा सहगल द्वारा वैक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए सप्ताह में एक दिन ड्राई डे के रूप में मनाने पर फोकस किया गया। इसके लिए व्यापक जन जागरूकता कार्यक्रम चलाने की बात कही गई ताकि घरों के आसपास विशेष साफ-सफाई का ध्यान रखकर मच्छरों को पनपने से रोका जा सके। मानसून और उसके बाद के मौसम में मच्छरों के पनपने की संभावना अधिक होती है। इसके लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जलजमाव को रोकने और लार्वा विनिष्टीकरण Larvicide Spraying अभियान में तेजी लाने की बात कही गई।

बैठक के दौरान मच्छरों के काटने से होने वाले विभिन्न फैक्टर जनित रोगों से बचाव रोकथाम के विभिन्न उपाय बताए गए। इस दौरान बताया गया कि ग्रामीणों को सोते समय अनिवार्य रूप से मच्छरदानी (LLIN) का उपयोग करने और बुखार आने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराना चाहिए। साथ ही अपने व्यवहार में परिवर्तन लाकर मच्छरों के पनपने वाले कारणों पर विशेष ध्यान देते हुए उनके विनष्टीकरण के उपाय करने चाहिए।

इसके अतिरिक्त मलेरिया नियंत्रण के लिए केवल स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि पंचायती राज, शिक्षा विभाग, नगर परिषद और समाज कल्याण विभाग, जन-सम्पर्क विभाग आदि के आपसी समन्वय को आवश्यक बताया गया। स्कूल एवं कॉलेज में बच्चों के बीच वैक्टर जनित रोगों के कारण एवं इसके रोकथाम के उपाय बताने का निर्णय लिया गया। उपरोक्त सभी संबंधित विभागों को अपने-अपने स्तर से समन्वय बनाते हुए मच्छरों के नहीं पनपने एवं उनके लार्वा विनष्टीकरण तथा वैक्टर जनित रोगों से आवश्यक रोकथाम हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार करने की अपील की गई।

इस बैठक में उपरोक्त पदाधिकारियों के अतिरिक्त पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, समाज कल्याण विभाग, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, शिक्षा विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग समेत अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थें।

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