शिक्षक वह दीपक हैं,जो खुद जलकर विद्यार्थियों के जीवन को रोशन करते हैं : सुरेंद्र विश्वकर्मा
गढ़वा से विकास कुमार की रिपोर्ट
जीवन में सफलता की राह दिखाने वाला व्यक्ति अगर कोई है,तो वह शिक्षक है,शिक्षक केवल किताबों का ज्ञान नहीं देते,बल्कि संस्कार,अनुशासन और जीवन जीने की सही सीख भी देते हैं,इसी गुरु शिष्य के पवित्र रिश्ते और शिक्षकों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता का भाव शनिवार को दयानंद आर्य वैदिक लीलावचन पब्लिक स्कूल,लातदाग में देखने को मिला,यहां छात्र छात्राओं द्वारा शिक्षक दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया,कार्यक्रम में विद्यालय के सभी छात्र छात्राओं के साथ शिक्षक शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के निदेशक सुरेंद्र विश्वकर्मा एवं प्राचार्य मनोज कुमार ने भारत के महान शिक्षाविद्,दार्शनिक एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर की,दीप प्रज्वलन के साथ ही विद्यालय परिसर में गुरुजनों के सम्मान और उनके योगदान को याद किया गया।
कार्यक्रम का संचालन विद्यालय की छात्राओं दिव्या,नव्या,बेबी,नूरजहां,नेहा,सृष्टि एवं राजनंदनी ने किया,छात्राओं ने कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाते हुए शिक्षक दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला,इस दौरान विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके योगदान को याद किया।
मौके पर विद्यालय के निदेशक सुरेंद्र विश्वकर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक किसी भी विद्यार्थी के जीवन में एक दीपक की तरह होते हैं,शिक्षक वह ज्योति है,जो स्वयं प्रकाशमान होकर छात्रों के जीवन में ज्ञान और संस्कार का प्रकाश भरने का कार्य करता है,शिक्षक बच्चों को केवल शिक्षा नहीं देता,बल्कि उन्हें जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने और सही रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है,उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाने में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है,एक अच्छा शिक्षक अपने विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारता है और उन्हें अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए निरंतर प्रेरित करता है।
वहीं विद्यालय के प्राचार्य मनोज कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों के जीवन को सार्थक एवं सफल बनाने में शिक्षक का योगदान अतुलनीय है,शिक्षक ही बच्चों के अंदर शिक्षा के साथ साथ संस्कार,अनुशासन,नैतिकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं,उन्होंने कहा कि एक शिक्षक विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ उन्हें बहुमुखी प्रतिभाशाली और आदर्श नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है,प्राचार्य ने कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी पर निर्भर करता है और उस युवा पीढ़ी के भविष्य को गढ़ने की जिम्मेदारी शिक्षकों के कंधों पर होती है,इसलिए शिक्षक का सम्मान वास्तव में ज्ञान,संस्कार और उस मार्गदर्शन का सम्मान है,जो एक विद्यार्थी को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाता है।
शिक्षक दिवस के इस अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों में भी खासा उत्साह देखने को मिला,बच्चों के चेहरे पर अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान और खुशी साफ दिखाई दे रही थी,कार्यक्रम ने विद्यालय में मौजूद गुरु-शिष्य के रिश्ते को और भी मजबूत किया।
कार्यक्रम में शिक्षक रिजवान अंसारी,नागेंद्र ठाकुर,अनूप,पवन,प्रियंका कुमारी,शमा परवीन एवं राधिका निरावती कुमारी सहित विद्यालय के सभी शिक्षक शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
अंत में यह कार्यक्रम एक खूबसूरत संदेश देकर समाप्त हुआ कि शिक्षक केवल वह व्यक्ति नहीं,जो हमें पढ़ाता है,बल्कि वह मार्गदर्शक है जो हमारे भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानकर हमें अपने सपनों तक पहुंचने का रास्ता दिखाता है,यही कारण है कि गुरु का स्थान जीवन में सदैव सबसे ऊंचा माना गया है।
